Author Topic: मन में चमकने की चाह रखो....  (Read 830 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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मन में चमकने की चाह रखो और फीतरत
मे थोडासा सब्र रखो, क्युकी आसमान में
कीतने भी काले बादल क्यु ना छाजाए...
आखिर में बारिश के रूप मे बेह जाते है... और
रोशनी की कीरन दीख ही जाती है।
- अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


shailesh borate

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Re: मन में चमकने की चाह रखो....
« Reply #1 on: December 22, 2014, 09:26:32 AM »
Nice kavita anamikaji


DM

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Re: मन में चमकने की चाह रखो....
« Reply #3 on: December 29, 2014, 11:29:16 AM »
Ekdum Sahi Baat Anamikaji :)