Author Topic: उठ पाखरा  (Read 646 times)

Offline sanjay limbaji bansode

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उठ पाखरा
« on: January 21, 2015, 09:48:27 AM »
उठ पाखरा फैलूनी पंख
झेप  घे  नभी  उत्तुंग ! !
नको राहू या संसारी दंग
होईल तुझी तपस्या भंग
दाखव तुझा जगी असली रंग

उठ पाखरा फैलुनी पंख
झेप  घे  नभी  उत्तुंग ! !

संजय बनसोडे

Marathi Kavita : मराठी कविता