Author Topic: चारोळी  (Read 1197 times)

Offline हर्षद कुंभार

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  • माझ्या कविता - हर्षद कुंभार
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चारोळी
« on: December 22, 2011, 10:42:14 PM »
हम जहा भी जाते है.... लबो पे एक नाम बन जाते है ,हर पल में एहसास बन जाते है, हमसे जरा बचके रहना....हम आंखोसे निंद और दिल से धडकन चुरा ले जाते है - हर्षद कुंभार
« Last Edit: December 22, 2011, 11:41:45 PM by MK ADMIN »

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