Author Topic: चारोळी  (Read 1235 times)

Offline हर्षद कुंभार

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  • माझ्या कविता - हर्षद कुंभार
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चारोळी
« on: December 22, 2011, 10:50:10 PM »
दिल की हर आवाज को
 प्यार का नाम मत दो,
चाहत की हर मांग को
प्यार नही केहते.
 हम तो हमेशा फिक्र में दुबे रहते है
और आप है की इसे हमेशा प्यार समज लेते है - हर्षद कुंभार   
 
« Last Edit: December 22, 2011, 11:41:28 PM by MK ADMIN »

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