Author Topic: मैत्री  (Read 2257 times)

Offline कवि - विजय सुर्यवंशी.

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  • सई तुझं लाघवी हसणं अजुनही मला वेड लावतं.....
मैत्री
« on: July 01, 2012, 03:11:58 PM »
  " विचारने विचारांची गुंफण होते,
     शब्दाने शब्द वाढतात .....
     मैत्रीच्या निर्मळ जळाने,
     वैराण माळरानं सुद्धा फुलतात ......."

                                कविवर्य - विजय अरुण सूर्यवंशी .
                                                 यांत्रिकी अभियंता

Marathi Kavita : मराठी कविता


yogesh Raut

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Re: मैत्री
« Reply #1 on: August 01, 2012, 01:17:34 PM »
" विचारने विचारांची गुंफण होते,
     शब्दाने शब्द वाढतात .....
     मैत्रीच्या निर्मळ जळाने,
     वैराण माळरानं सुद्धा फुलतात ......."

Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: मैत्री
« Reply #2 on: April 27, 2013, 04:43:39 PM »
छान :)

Offline कवि - विजय सुर्यवंशी.

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Re: मैत्री
« Reply #3 on: April 27, 2013, 07:18:02 PM »
 :) thank u milind ji..