Author Topic: " स्वयं को जान "  (Read 292 times)

Offline Ruchita Aglawe

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" स्वयं को जान "
« on: August 28, 2015, 10:14:01 PM »
ना कर घमंड इस शाही शरीर का
वो तो मिटटी का पुतला है
ना कर गर्व इस मन का
वो तो सदैव बदलती अवस्था है
ना कर प्यार इस संसार से
वो तो मोह माया का जाल है
ढूंड ख़ुशी अपने आप में
क्युकी सारा विश्वात्म तुझ् मे बसा है
ना बाहर ढूंड किसीको पूर्णतः के लिए
भीतर जा और जान तु स्वयं मे पूर्णतः है

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