Author Topic: पाउस कविता (भाग - ३)  (Read 927 times)

Offline केदार मेहेंदळे

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पाउस कविता (भाग - ३)
« on: July 24, 2013, 10:30:37 AM »
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हा  पाउस  सुध्धा  हल्ली
मी  घराबाहेर  पडायची  वाटच   बघत  असतो  जणू
कधीही  बाहेर  पडावं........
अचानक  गाठतोच  नाक्यावर

तू  नाहीका  जसा........
कधीही  बाहेर  पडावं  तर
येतोसच  समोरून .................
आगदी  माझी  वाट  बघत  असल्या  सारखा

पाउस  अन  तू
दोघेही  सारखेच
लबाड .....
हो  नं! 

 

 

केदार.....
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Offline sweetsunita66

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Re: पाउस कविता (भाग - ३)
« Reply #1 on: July 24, 2013, 01:27:35 PM »
मस्तच आहे केदार ! :) :) :)