Author Topic: श्रावण  (Read 546 times)

Offline kumudini

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श्रावण
« on: April 29, 2013, 04:06:54 PM »


लवलवणारा   सळसळ नारा

प्रसन्न  वदना  श्रावण   आला


किंचित काळे   निळे  सावले 

अंबरात   या  जलद  मिळाले

ओंजळीतून   उधळीत  मोती 

प्रसन्न  वदना  श्रावण   आला

पायी  बांधून  नुपूर  सरींचे  ]

नाद  घुमवीतो  मंद  मधुरसे

नक्षत्राचा   बांधून   शेला


प्रसन्न  वदना  श्रावण   आला

शिरी   मुकुट  हा  इंद्रधनुचा 

शिरपेच चमकतो   रविकिरणा चा

रंग  घेउनी   विविध   फुलांचा

प्रसन्न वदना  श्रावण आला

जल  लहरीवर  आरूढ  होऊन 

मृद्गंधा मध्ये   न्हाउन

निसर्ग  नजराणा   सवे घेउन

प्रसन्न  वदना   श्रवण  आला

कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: श्रावण
« Reply #1 on: April 30, 2013, 10:29:35 AM »
ओंजळीतून   उधळीत  मोती

पायी  बांधून  नुपूर  सरींचे

नाद  घुमवीतो  मंद  मधुरसे

नक्षत्राचा   बांधून   शेला

प्रसन्न  वदना  श्रावण   आला


apratim kavita aahe!!! :) :) :)

Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: श्रावण
« Reply #2 on: April 30, 2013, 12:52:19 PM »
chan...pan ajun yeu tar de!

Offline विक्रांत

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Re: श्रावण
« Reply #3 on: May 05, 2013, 07:48:06 PM »
पाडगावकरांना श्रावणात घननीळा भर उन्हाळ्यातच सुचली होती. :)

Offline shashaank

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Re: श्रावण
« Reply #4 on: May 28, 2013, 04:54:58 PM »
अतिशय सुंदर.