Author Topic: झूला  (Read 520 times)

Offline kumudini

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झूला
« on: May 04, 2013, 03:44:36 PM »
 
चांदण्या  रातीला

झूला  बांधावा  आंब्याला

उंच  नेऊन  झोक्याला 

घ्यावे  ओंजळी  चंद्राला

झोका  नेऊन  आभाळा

घ्यावे वेचून  तारा फुला

त्याच्या  पाहून  लावण्या

वेड  लागते  जीवला

झोत  आकाश  गंगेचा 

वाहे  प्रकाश  तेजाचा

 काठी  बसून  तियेच्या

न्याह ळावे  त्या  तेजाला

सारी  रात  सोन्द्ररयाचा 

होता  खजिना  लुटला

रामपारी  जाग  आला

होता  सूर्य  देव  उगवला

                                    कुमुदिनी  कळीकर 


 

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: झूला
« Reply #1 on: May 04, 2013, 04:01:39 PM »
अप्रतिम……….
 :) :) :)

Offline विक्रांत

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Re: झूला
« Reply #2 on: May 05, 2013, 07:44:23 PM »
 :) छान