Author Topic: साद प्रतिसाद  (Read 547 times)

Offline kumudini

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साद प्रतिसाद
« on: May 07, 2013, 03:43:41 PM »
 
कुहु  कुहु  करुनी  कोकीळ  घाली  साद  वसंताला 

प्रसन्न  वदने   तोही  आला  भेटाया  तिजला

गर्द  पाचूचा  शालू  हिरवा  सजवी  वासुधेला 

रजनीने ही  चमचमणारा  शेला  पांघरला

पान  गळी चा  सडा  सभोती  पडतो  दृष्टीला

पालवी  कोमल  सजवीत  आहे  लतिका  कुन्जाला

कळ्या  कोवळ्या  जाई  जुईच्या  अन्कावर  फुलल्या

दिशा  दिशातून  शुभ्र  मोगरा  पसरवी  गंधाला

आम्र  वृक्षीच्या  तख्ता  वरती  फळ राजा  शोभला 

करिती  मुजरा  मानाचा  हो  जाता  येता  त्याला

परमेश्वर  हि  सृष्टीच्या  या  रूपावर  भुलला

अमृत  कुंभाचा  नजराणा  बहाल तिजसी केला

वसुंधरेचे  रूप  मनोरम  वसंतात  खुलते

नव  चैतन्याचा  संदेशाला  देते

नवीन  वर्ष  हे  म्हणूनी  करू  या  अभिवादन  सकला

सौख्य  शांती  ही  जीवनी  लाभो  प्रार्थू  ईशाला 

                                         कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: साद प्रतिसाद
« Reply #1 on: May 07, 2013, 05:05:28 PM »
chan

Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: साद प्रतिसाद
« Reply #2 on: May 08, 2013, 12:07:18 PM »
छान कविता आहे!