Author Topic: आई  (Read 979 times)

Offline aap

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आई
« on: May 25, 2013, 07:31:20 PM »
लागता. पडता, कळवळता

मुखी येई आई आई

तानुविणेची तार छेडीता

गात्री गात्री झंकार आई

आईसारखे दॆवत न असे दुजे

आईमुळे अस्तित्व माझे

                   सौ.   अनिता फणसळकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline प्रशांत नागरगोजे

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Re: आई
« Reply #1 on: May 26, 2013, 10:10:18 AM »
बरोबर..... :)