Author Topic: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर  (Read 919 times)

Offline kumudini

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शब्द  हे  घेऊनि                                             शब्द   सूर 

सूर तू देशील क


गीतात  माझ्या

प्राण  तू  भरशील  ना

शब्द  हे  बापुडे   

सुराविना  पोरके

बांधून  बंदिशीत  त्या

वैभवा  नेशील   ना

संगीत  हे  तुझे

 अन  गीत  माझे

सूर  ताला  बांधुनी त्या

अमर  त्या करशील ना 

                                   कुमुदिनी  काळी कर 

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline rudra

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Re: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर
« Reply #1 on: May 29, 2013, 12:17:49 PM »
kamudini, apratim kavya aahe...

copy pest karayla ghai karu nako....

Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर
« Reply #2 on: May 29, 2013, 01:33:22 PM »
very nice..... :)

Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर
« Reply #3 on: May 29, 2013, 01:51:23 PM »
va va....typing ani presentetion nit hav
 

Offline कवि - विजय सुर्यवंशी.

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  • सई तुझं लाघवी हसणं अजुनही मला वेड लावतं.....
Re: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर
« Reply #4 on: June 05, 2013, 10:38:05 PM »
Nice one

Offline kumudini

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Re: शब्द हे घेऊनि शब्द सूर
« Reply #5 on: June 08, 2013, 03:26:15 PM »
Please send your E-Mail ID. Thanks for your compliments and appreciation. :)
Kumudini Kalikar