Author Topic: ऋतू बहार  (Read 730 times)

Offline aap

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ऋतू बहार
« on: June 09, 2013, 11:21:11 AM »
ऋतू बहार

चॆत्र वॆषाख  चाहूल लागे

ऋतुराज वसंत नाचू लागे

वृक्षासी नव पर्ण विराजे

पक्षी कोकिला गाऊ लागे

वसंत वॆभव ऋतू हा गोड

      जेष्ट आषाढ चाहूल लागे

ऋतुराज ग्रीष्म भासू लागे

वसुंधरा हि तापू लागे

ग्रीष्माचा ऋतू दाहक लागे

ग्रीष्म वारा देई मना ओढ

         श्रावण भाद्रपद चाहूल लागे

वर्षाऋतू बरसू लागे

कृषीवलाना आनंद लागे

ऋतू वर्षेची लागे मना ओढ 

आश्विन कार्तिक चाहूल लागे

ऋतू शरदाची आस लागे

टिपूर चांदणे बरसू लागे

चंद्रकला हि झळकू लागे

कोजागिरी पुनवेची लागे मना ओढ

          मार्गशीर्ष पौष चहूल लागे

ऋतू हेमंताची वर्णी लागे

थंडीची हि चाहूल लागे

तीळ गुळाची आस लागे

प्रेम सुधेच्या गोडीची मना लागे ओढ

            माघ फाल्गुन चाहूल लागे

ऋतू शिशिराची नांदी लागे

शीतल वारा वाहू लागे

अंगी शिरशिरी येऊ लागे

शिशिर ऋतूच्या गुलाबी थंडीची लागे मना ओढ

                                                           सौ अनिता  फणसळकर



                     

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline केदार मेहेंदळे

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Re: ऋतू बहार
« Reply #1 on: June 10, 2013, 12:53:55 PM »
chan