Author Topic: कृतार्थ  (Read 641 times)

Offline kumudini

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कृतार्थ
« on: June 14, 2013, 10:28:47 AM »
कृतार्थ
                                   
पोटी  माझ्या  जन्मा  येऊन  कृतार्थ  मज  केले
आई  हाक  ही  कानी  येता  ,स्वर्ग  सुख  गवसले
कौसल्या  सुत  देवकी  नंदन  ,त  रुपी  पहिले
वर्णायला  त्या  सौख्याला  शब्दच  ना  उरले
मातृदेवो  भव  सिद्ध  ऋषींनी  आहे  म्हटलेले
त्या  मानाची  मानकरी  मी  तुझ्यामुळे  झाले
आद्य  गुरु  हा  आई  असते  वेदांनी  वदिले
अनुभव  सगळा  तुझ्यामुळे  ,बाळा  धन्य  जगी  झाले
तुझिया  नयनी  प्रतिमा  माझी  नित्यच  मी  पाहते
हात  चिमुकले  हाती  घेऊन  आधारा  शोधते
ऋणास  तुझिया  फेडू  कैसे नाही  मज  कळले
ऋणात  तुझिया  मीच असावे  हेच  मला  भावले
                                                                                                    कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline rudra

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Re: कृतार्थ
« Reply #1 on: June 14, 2013, 12:09:20 PM »
kamudini.....sundar rachna mandli ahes...

Offline sweetsunita66

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Re: कृतार्थ
« Reply #2 on: July 07, 2013, 03:34:04 PM »
अतिशय सुंदर रचना !! :) :) :)