Author Topic: कृष्णसखा .... सावळसा  (Read 475 times)

Offline shashaank

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कृष्णसखा .... सावळसा
« on: August 06, 2013, 04:19:34 PM »
कृष्णसखा .... सावळसा

नितळ सुखद ...... भिरभिरता
पान पान ........ रसरसता

पाचूसम ....... चमचमता
पारिजात ...... टपटपता

गवतातून .... सळसळता
वार्‍यातून ..... भुरभुरता

थेंबातून ..... दुडदुडता
श्रावण हा ..... रिमझिमता

गीत नवे ..... किलबिलता
आसमंत ..... रुणुझुणुता

जाईजुई ..... मोहरता
धुंदगंध ...... उधळता

देई दान ..... सात्विकता
दशदिशात .... मंगलता

लावी पिसे ...... कृष्णकथा
राधा मनी ..... व्याकुळता

भान असे ...... हरपता
अंतरात ....... झिरपता

दूर करी ..... खिन्नता
दे पुन्हा ..... प्रसन्नता

लावी का ...... हुरहुरता
साजण हा ....... अद्भुतसा
कृष्णसखा ....... सावळसा
श्रावण हा ...... सावळसा


-shashaank purandare.

Marathi Kavita : मराठी कविता