Author Topic: मेणबत्ती  (Read 652 times)

Offline Mrs. Sanjivani S. Bhatkar

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मेणबत्ती
« on: August 12, 2013, 03:34:19 PM »
मेणबत्ती

 

काळोखाच्या भयाण राती

सोन्याचे  घर , दिसते  माती

पाहसी  मागे  बघुनी   किती

रंग - बेरंगी  मेणबत्ती

मऊ  मेणाची  मोहक  मूर्ति 

घरा  घरातुनी  लुकलुकती

काळोखाच्या  भयाण  लाटा 

उठती  फूटती  बारा  वाटा

दंड  ही  आहे  भक्कम  फार

हात   लावता  पडेल  काय

नाजूक  मूर्ति  नाजुक  काम 

मऊ  मेणाची  मोहक  मूर्ति 

प्रकाश  पाडिती  परोपरी 

स्नेह्शुन्य   ते  सदा  अंतरी 

मऊ  मेणाची  मोहक  मूर्ति 

 

 

 

सौ  संजीवनी  संजय  भाटकर

Marathi Kavita : मराठी कविता