Author Topic: देव स्वप्नात येतो  (Read 577 times)

Offline kumudini

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देव स्वप्नात येतो
« on: October 30, 2013, 04:54:33 PM »
                                                          देव  स्वप्नात  येतो


एक  दिवस  ताप  मला  आला 

देवपूजेचा  नेम  माझा  चुकला 

हुरहूर  लागली  माझ्या  मनाला

अन  झोपेनेही  संप  पुकारला

देव  माझ्या  स्वप्नात  आला

म्हणाला  मीच  आणला  ताप  तुला

कारण  तुझ्या  पुजेचा  कंटाळा  आला  मला

गार  गार  पाण्याने  आंघोळ  घालते

थंडीने  ओठ  माझे  कुडकुडते

तुझ्या  उदबत्तीने  श्वास  माझा  कोंदला

हळद  कुन्काने  डोळे  लागले  चुरचुरायला

रोज   तोच  भसाडा  आवाज  आरतीला

अन  तीच  आरती  ऐकून  कानठाळया  माझ्या  बसल्या

रोज  पचपचीत  दूध  नैवेद्याला

चमचमीत  खायला  आवडतेन  मला

नको  तरी  फूल  वाहते  मला

वाळल्यावर  ते  टोचतेन  मला

अशीच  गप गार  पड  बिछान्याला

अन  विसावा  घेऊ  दे  मला

                                                   कुमुदिनी  काळीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता

देव स्वप्नात येतो
« on: October 30, 2013, 04:54:33 PM »

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Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: देव स्वप्नात येतो
« Reply #1 on: October 30, 2013, 05:06:54 PM »
 :D :D :D

 

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