Author Topic: शायरी एक शराबी की .....  (Read 2103 times)

Offline Surya27

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शायरी एक शराबी की .....
« on: October 26, 2014, 12:10:02 AM »
मुझे अपनोनेही लुटा गैरो में कहा दम था
मेरी कश्ती डूबी वहा जहा दारू मिलना मुश्किल था

रात रात भर जगता रहा उसके खयालों में
जब भी खुली मेरी आँखे पाया उसे प्यालो में

ना दुनिया से करू कोई शिकवा ना है कोई गम
मिल जाये अगर थोडीसी व्हिस्की या रम

दुनियासे रुखसत होने से पहले बस एक ही ख्वाहिश होगी
मेरी अर्थी पर इत्तर के बदले  बुँदे शराब की ही होगी   

जनाजे में मेरे हर शख्स को पीकर ही आना होगा
मेरे जनाजे को कन्धा सिर्फ एक शराबी ही देगा 

जलाने के पहले एक बोतल मेरे बाजु में रख देना
लकडियों पर रॉकेल के बदले शराब छिड़क देना

साल में एक बार मुझे याद जरुर कर लेना
मेरी तस्वीर के सामने एक बोतल शराब की रख देना

............................................................. सूर्या

Marathi Kavita : मराठी कविता