Author Topic: नया बसेरा......  (Read 589 times)

Offline Surya27

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नया बसेरा......
« on: October 27, 2014, 10:17:17 PM »
कुछ पल का साथ होता है अपनोका
बस इक झरोखा होता है सपनोंका

कोई किसीका नहीं होता है अंत में
रूह तक नहीं होती है अपने वश में

मौत तो एक बहाना बन जाता है
हर पल तो यहाँ जलाया जाता है

मिलने के लिए तो हजारो मिलते है
पर मन के फुल कम ही खिलते है

बूंद बूंद को तरसता है सागर
जल होकर भी प्यासी नजर

कुछ भी नहीं है यहाँ तेरा या मेरा
हर दिन होता है एक नया बसेरा
………………………………………… सूर्या

Marathi Kavita : मराठी कविता