Author Topic: आज ईस तनहाई से डर लगने लगा है.....  (Read 645 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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आज ईस तनहाई से डर लगने लगा है
आने वाले तुफान का ये मंजर लगने लगा है
ईस बेदर्दी से तोड़ा था ईक दील जो मैंने,
उन्ही बद्दुआओका ये असर लगने लगा है।

पलकों की ईन अश्को मे, जहर लगने लगा है
अपनीही बर्बादी का ये कहर लगने लगा है
मोहोब्बत की दुनिया जो उजडी थी कीसीकी,
आज मातम से सजा मेरा शहर लगने लगा है।

शोहरत और रूत्बा अब बेकार लगने लगा है
आईने मे ये अक्स मेरा लाचार लगने लगा है
जीतेजी जो कतल कीया था कीसीको मैने
मेरा ही कीरदार, मुझे गुनहगार लगने लगा है।

- अनामिका
« Last Edit: November 15, 2014, 11:58:44 PM by @Anamika »

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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