Author Topic: नसीब के आगे कीसीकी चल नहीं सकती.....  (Read 927 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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जिंदगी की सच्चाई कभी बदल नहीं सकती
नसीब के आगे कीसीकी चल नहीं सकती
लाख गुरूर करे वो समंदर भी खुद पर
प्यास उससे कीसी की बुझ नहीं सकती.

सीयासतो में सीटे कीसीकी टीक नही सकती
ये राजनीति है, कीसीकी हो नही सकती
बडी तवज्जो से पढा था ऊस दीन जो अखबार
आज उसकी खबरें फीर से बिक नही सकती.

माजी की गलतीयाँ कभी मीट नही सकती
तसव्वूर मे जिंदगी कट नही सकती
रास्ते जहाँ लेजाए वहा चलते रहना सीखो
यु रूकनेसे मंजिल मील नही सकती.

वक्त की ये रफ्तार कभी रूक नही सकती
बढती उम्र से क्या डरना, वो थम नहीं सकती
ईस जवानी में थोड़ा सा जी लेते है यारों
ये जिंदगी दोबारा मील नहीं सकती.

अकड और ईबादत एक हो नही सकती
लाख पैसों से मन्नत पुरी हो नही सकती
सजदे मे झुकना है तो दील से झुकों
यु खुदा की रहमत तुम पे हो नही सकती.

- अनामिका

तवज्जो= ध्यान
माजी= अतिथ
तसव्वुर = कल्पना