Author Topic: यहाँ बस्ती में गालीगलोच, और मस्जिद में आझान है......  (Read 705 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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सुकून और अमन का यहाँ एक ही मकान है
मुफ्त का बसेरा है जहाँ, वो शमशान है।

ना दोस्त, ना दुश्मन, ना मेहबूब का दामन
भीड़ मे फसी तनहाईयोंका ये कबरिस्तान है।

ताऊम्र अना को, वो गिरवी रखते आया है
बस औलाद की खातिर ये बाप के लिये आसान है।

आज भरे बुढ़ापे मे बेटा बाप को न पुछे,
बाप की तमाम कुरबानीयोंका, ये कैसा सम्मान है?

ना खाने को निवाला, ना शरीर मे जान है
गरीब की जिंदगी मे बस थकान और तुफान है।

फकीर के लिये एक और दुश्वार दीन,
बस अमीरों का ही त्योहार और अमीरों का ही रमजान है।

सिर्फ धर्म के बात में यहाँ सबकी आन है
ना गीता जानते है, ना पढ़ा कुरान है।

बस नाम का है खुदा, और नाम का ही भगवान है
यहाँ बस्ती मे गालीगलोच, और मस्जिद मे आझान है।

- अनामिका
« Last Edit: December 07, 2014, 12:56:01 AM by @Anamika »