Author Topic: आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।  (Read 616 times)

Offline AKSHAY BHALGAT

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१. हँसा तो सब देते हे , वो लोग …… 
    आपकी आंखो से वो , गम के आंसू पिना अच्छा लगता है …
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

२. भुल जाते है " राही " , अपनी राह चलते चलते …
    आपकी बातो मे , वो खुदको भुलाना … अच्छा लगता है ….
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

३. छूट जाते है , हाथ भी .. अपनो के , अपनो से ….
    आपके इस दर्द में , हाथ थाम लेना अच्छा  लगता है ….
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

४. बहाणो - बिन-बहाणो से , खामोश रहना …।
    आपकी हर बात को , खामोशी से दोहरना अच्छा लगता है ….
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

५. समझ - ना-समझ तो , अपनी नाराजगी कि बाते है …
    उस बात मे भी …, आपको समझना अच्छा लगता है ….
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

६. मिल जाते ही हमदर्द भी ., इन मंदिर - मज्जिद्दो मे …,
    तुझमे मेरा खुदा , मेरा दीदार देखना … अच्छा लगता है …
    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं ।

    आपकी यादो में खुदको सवांरना, अच्छा लगता हैं । 


अक्षय भळगट  :)

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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