Author Topic: क्या करे जनाब अपनी कीस्मत बडी कमिनी है....  (Read 622 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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हर बंदे के जबान पर अब यही एक कहानी है
क्या करे जनाब अपनी कीस्मत बडी कमिनी है।

धोखा दीया सपनों ने, इन आँखो में बस पानी है
साये की तरह चीपकी ये फुटी तकदीर अपनी दीवानी है।

गरीब बच्चा जो भूल करे तो जान पर उसके बन आनी है
अमीर शहजादा कतल भी करे तो ये उसकी नादानी है।

पैसा कमाने का जरीया यहा बस बेईमानी है
वफादारी से नौकरी अब कीसको यहाँ निभानी है?

काम की बात हो तो सबको रंजीशे भुलानी है
मतलब खत्म हो तो यहाँ दोस्ती में भी दुश्मनी है।

पढा लीखा होकर सबको परदेस से रोटी कमानी है
कहते है अपने देश मे अब कहा जिंदगी गवानी है।

बीवी के खातिर सबको यहाँ महँगी चीजे लानी है
बुढी माँ की तकलीफे तो जानकर भी अंजानी है।

हर फकीर को यहाँ जिंदगी ऐसे बीतानी है
पापी पेट का सवाल है तो करेले में भी चिनी है।

सबके अपने झमेले और सबकी अलग कहानी है
फीर भी सब कहते है अपनी कीस्मत बडी कमीनी है।
- अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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