Author Topic: तो क्या हुआ की ऊपर वाले की आज मुझपे रहमत नही जहाँ अंधेरा हटकर उजाला ना हो ऐसी कोई कुदरत नही।  (Read 471 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 280
  • Gender: Female
तो क्या हुआ की ऊपर वाले की आज मुझपे रहमत नही
जहाँ अंधेरा हटकर उजाला ना हो ऐसी कोई कुदरत नही।

बडे बड़े तुफान आएं पर आज भी डट के खडा हु
देखले मुझे जिंदगी, अब मुझमे तेरी दहशत नही।

जिंदादीली से हसता हु तो आज भी लोग फसते है
अपने अश्को का इश्तिहार करू ऐसी मेरी आदत नही।

नादान है वो शक्स जीसने हरा दीया था मोहब्बत मे
आज बेईज्जत उसे करदू ऐसी मेरी फीतरत नही।

जवानी का तो आगाज है उम्र अभी लंबी है
मुंतजीर हु मौत का जैसे जीनेकी मुझे हसरत नही।

कीसीने दील की गहराई से मुझे बद्दुआओसे नवाजा होगा
लगता है अब दुआओकी मेरी तकदीर में बरकत नही।

जख्मोका सैलाब उबलता है तो कलम से लहू बहता है
राज-ए-दील जो बोलके रखदू अब इतनी मुझे फुरसत नही।
- अनामिका

कुदरत - निसर्ग
मुंतजीर- वाट बघणारा
अश्क- अश्रू
ईश्तिहार-जाहीरात
फीतरत- स्वभाव
बरकत- क्रुपा
लहू- रक्त
हसरत-इच्छा
दहशत - भिती
« Last Edit: January 19, 2015, 06:30:38 PM by @Anamika »


 

With Quick-Reply you can write a post when viewing a topic without loading a new page. You can still use bulletin board code and smileys as you would in a normal post.

Name: Email:
Verification:
पाच अधिक पाच अधिक शून्यं  किती ? (answer in English number):