Author Topic: बिछड गया जो मुझसे वो बेवफा तो नही था पर मेरा उस्से जुदा होना बेवजह भी नही था।  (Read 913 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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बिछड गया जो मुझसे वो बेवफा तो नही था
पर मेरा उस्से जुदा होना बेवजह भी नही था।

दील के कुछ गहरे राज अंदर ही दफन करदीये
यु होठ सीलके मुस्कुराना खामखा भी नही था।

मनमानी और बगावत तो आदत है ईस दील की
जिद्दी है ये दील लेकिन बेहया भी नही था।

दीलो का ये खेल कोई समझदारी से थोड़ी खेलता है
मिजाज से दोनों नवाब थे कोई बेचारा भी नहीं था।

खुन मे जवानी दौडती है और ईसका कोई ईलाज नही
खेल मे वैसे दील लगानेका तो मेरा भी ईरादा नही था।

कीस्मत की ये बात है कुछ दीन बाद समझ आएगी
वर्ना हम दोनों में कोई गलत भी तो नही था।

ना दील मे कोई मलाल है ना लबो पे कोई बद्दुआ
कल वक्त कैसा आएगा ईसका अंदाजा भी तो नही था।

भुलना ईतना आसान नही पर मजबूरीयाँ भी होती है
ईस तरह कीसीको भुलनेवाला मै अकेला भी तो नही था।

ये उपरवालेका खेल है अपने समझ में नही आएगा
जो भी करेगा ठीक ही करेगा वो पराया भी तो नही था।

दील तो वैसाही है पर अब दीमाग बोलने लगा है
यु मतलबी बनने के अलावा और कोई चारा भी तो नही था।

कुछ ही दीनों का खेल है फीर मंजील अपनी अलग है
वर्ना दील के खेल में अबतक मैं भी हारा नही था।
- अनेमिका


 

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