Author Topic: वो ख्वाहिशें ही क्या जिनकी चाह ना हो खुदा रास्ता दिखाएँगा अगर कोई राह ना हो।  (Read 638 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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वो ख्वाहिशें ही क्या जिनकी चाह ना हो
खुदा रास्ता दिखाएँगा अगर कोई राह ना हो।

वाबस्ता उन लोगों से फकत नाम का रहता है
जहाँ मुस्कुराकर झगड़े में इक सुलाह ना हो।

उन गजलों से, उन नजमों से वो शायर भी रूठ जाता है
अगर उसकी शायरी पे कभी वाह ना हो।

वो खुबसूरती किस काम की जो दीदार की मोहताज है
जिसे नकाब मे भी परखने वाली कोई निगाह ना हो।

उस मौलवी की भी दुआ कभी कबूल नही होती
अगर उसकी रूह में अल्लाह ना हो।

संगेमरमर के महलों मे भी वो सुकून नही आएगा
जो किसी अपने के दिल में मेरी पनाह ना हो।
- अनामिका

वाबस्ता - relation
सुलाह- compromise
मौलवी- मुसलमान पंडीत
पनाह- जागा
« Last Edit: February 10, 2015, 02:22:40 AM by @Anamika »


 

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