Author Topic: अनामिका  (Read 548 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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अनामिका
« on: February 25, 2015, 01:39:58 AM »
हर सुबह इन आँखोमे इक पहेली सी रहती है
थोड़ी ही सही, पर आँखो में लाली सी रहती है।

पुंछता है कोई जब इन लाल आँखो का सबब
नजाने क्यु ये जबान खाली सी रहती है।

ढूँढती हूँ ख्वाबोमें जब जिंदगी के रंगोको
सपनों की दुनिया भी बस काली सी रहती है।

झूकती है अक्सर पर टूटती नही है
मेरी जिंदगी भी किसी पेड़ की डाली सी रहती है।

फीसल जाते है हाथो से रेत की तरह लम्हे
किनारे पर ये मुट्ठी सिर्फ गीली सी रहती है।

मोहताज नही है वो किसी चाँद, सूरज की चमक के
इन जुगनूओ में भी 'अनामिका' के सहेली सी रहती है।
~ अनामिका

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