Author Topic: अनामिका  (Read 495 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 329
  • Gender: Female
अनामिका
« on: February 25, 2015, 01:39:58 AM »
हर सुबह इन आँखोमे इक पहेली सी रहती है
थोड़ी ही सही, पर आँखो में लाली सी रहती है।

पुंछता है कोई जब इन लाल आँखो का सबब
नजाने क्यु ये जबान खाली सी रहती है।

ढूँढती हूँ ख्वाबोमें जब जिंदगी के रंगोको
सपनों की दुनिया भी बस काली सी रहती है।

झूकती है अक्सर पर टूटती नही है
मेरी जिंदगी भी किसी पेड़ की डाली सी रहती है।

फीसल जाते है हाथो से रेत की तरह लम्हे
किनारे पर ये मुट्ठी सिर्फ गीली सी रहती है।

मोहताज नही है वो किसी चाँद, सूरज की चमक के
इन जुगनूओ में भी 'अनामिका' के सहेली सी रहती है।
~ अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता

अनामिका
« on: February 25, 2015, 01:39:58 AM »

Download Free Marathi Kavita Android app

Join Marathi Kavita on Facebook

 

With Quick-Reply you can write a post when viewing a topic without loading a new page. You can still use bulletin board code and smileys as you would in a normal post.

Name: Email:
Verification:
दोन अधिक पाच किती ? (answer in English number):