Author Topic: गरमी का मौसम  (Read 367 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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गरमी का मौसम
« on: May 23, 2015, 11:35:59 PM »
बच्चों को छुट्टियाँ लगती हैं
गरमी का मौसम आता हैं
साथ में गुजरे बचपन की
मीठी यादें लाता हैं।

याद आता हैं मुझे
अब वो नाना-नानी का गाँव
तपती गरमी के मौसम में
वो पीपल की ठंडी छाँव।

सारे मिल के सुनते थे
नानी की परियों की कहानी
दोपहर में नहाने जाते थे
वो नदियों का ठंडा पानी।

गुजरे बचपन की ठंडक
न जाने कहाँ खो गई हैं?
अब तो लगता हैं प्रकृती भी
अपना नियम भूल गईं हैं।

इसी गरमी के मौसम में कभी
सारी जमीने जल जाती हैं
तो कभी अचानक बारिश से
किसान की उम्मीदे धूल जाती हैं।

गरमी से बेहाल आदमी
बस इल्जाम देने को तैयार हैं
जरा सोचो इस अवस्था पर
सब बराबर जिम्मेदार हैं।

शहर पर शहर बढेंगे
पर रौनक कहाँ से मिलेगी?
पेड़ पौधे कट जाएंगे
तो ठंडक कहाँ से मिलेगी?

कहर होते ही सवरने की
किसे मोहलत मिलती हैं?
जब जब कुदरत खुद अपनी
बगावत पर उतर आती हैं।

सुनना, सूनाना छोड़ कर
अब सब को सोचना चाहिए।
कुदरत के इस विनाश को
मिल के रोकना चाहिए।
~ अनामिका

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