Author Topic: गुनाह कर कर के थक गया हूँ...  (Read 448 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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गुनाह कर कर के थक गया हूँ मालिक,
हो सके तो थोडी रजा दे दे
.
रहम-ओ-करम से तेरे शर्म आती हैं,
आखिरी रहम कर अब सजा दे दे
.
रखकर तुझे जुबान पे अक्सर
मैं जहन से निकाल देता हूँ तुझे
.
ऐसा मैं इक फरेबी हूँ मालिक
तू जीने कि जायज वजह दे दे।
~ अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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