Author Topic: इजाजत हो तो दिल के राज हम भी खोल के आते हैं।  (Read 413 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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शराबों की महफिल में भी जहर घोल के आते हैं
लफ्ज मेरे, शायरी मेरी और लोग बोल के आते हैं।
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बरसों से जो जमा थे वो सारे ही सिक्के खोटे निकले
सोचा था जिन्हें मुसीबत में, हम भी तोल के आते हैं।
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गरीबी में क्या बातें करना ये कैसा और वो कैसा
अमीर *माजी के पुर्जे जरा अपने भी टटोल के आते हैं
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मशहूर ना कर दे जमाना उसे मेरी बेखौफ नजरों से
इजाजत हो तो दिल के राज हम भी खोल के आते हैं।
~ अनामिका
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माजी= past

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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