Author Topic: फकत खिताब मिलने से यहाँ बादशाही नहीं होती...  (Read 323 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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वहाँ दिये तो जल ते हैं मगर रोशनाई नहीं होती
तवायफों के मुकद्दर में कभी शहनाई नहीं होती।
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हुक्म था पंखों का अब दुनियादारी निभाई जाएँ
वर्ना परिंदे की पेड़ से कभी बेवफाई नहीं होती।
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जज्बातों से बखूबी खेला, लफ्जों को मापा तोला नहीं
वर्ना कभी की महफिलों में यूँ रुसवाई नहीं होती।।
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तमाम मुल्क की आवाम भी अब दंगो पर उतर आती हैं
फकत खिताब मिलने से यहाँ बादशाही नहीं होती।
~ अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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