Author Topic: तेरी मोहब्बत तो फिर भी दो ही दिन का फसाना थी...  (Read 445 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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यादों को न याद दिला, कभी न कभी ठहर जाएगी
बिखरी पड़ी जिंदगी हैं, आज या कल में सवर जाएगी
तेरी मोहब्बत तो फिर भी, दो ही दिन का फसाना थी
मेरी नफरत जो आएगी, कयामत बन के गुजर जाएगी।
~ अनामिका
« Last Edit: October 19, 2015, 11:21:41 PM by @Anamika »

Marathi Kavita : मराठी कविता


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