Author Topic: कल की शायरी..  (Read 1244 times)

Offline Rohit Dhage

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कल की शायरी..
« on: December 05, 2011, 11:58:36 PM »
इस जीने के अंदाज़ है कितने निराले
कभी लगता है की जान गयें हम सारे
वोह लम्हे हम जी लिए है सारे
मगर पहचान पायें वोह जिंदगी ही क्या थी
हर बार एक नया रंग है जिन्दगी
इक नयी गहरायी है ज़िन्दगी
इन्ही गहराईयों में खोकर रह जायें हम कहीँ
अपने होनेका एहसास भी ना हो कभी
कुछ ऐसी हो ज़िन्दगी हमारी
कुछ लम्हे भी जी जायें तो गम नहीं
जो जिया ही नहीं वोह लम्हा ही क्या था
जिनमे लम्हा ना था वोह भी क्या जीना था
इन्ही लम्हों में खोकर रह जायें हम कहीँ
कुछ ऐसी हो ज़िन्दगी हमारी

- रोहित

Marathi Kavita : मराठी कविता

कल की शायरी..
« on: December 05, 2011, 11:58:36 PM »

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ganesh.patil22

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Re: कल की शायरी..
« Reply #1 on: December 06, 2011, 06:40:28 AM »
Good.

 

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