Author Topic: पहिल्यांदा काहीतरी बोलली माझी परी  (Read 1255 times)

Offline amoul

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आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी,
पहिल्यांदा  काहीतरी  बोलली  माझी  परी,
तिचे  बोबडे  बोल  मला  कळत  नव्हते  जरी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

तिच्या  मऊशार  हातांच्या  मऊशार  बोटांनी,
कुरवाळत  माझ्या  गालांना  बोलली  ती  ओठांनी,
स्वर्गसुख्खच   जणू  प्राप्त   झालं  मला  माझ्या  घरी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

ती  काय  बोलत  होती  तिलाच  काय  ते  ठाऊक,
तिच्या  बोलण्याच्या  सोहळ्यात  मी  मात्र  भाऊक,
नकळत  डोळ्यातून  बरसल्या  आनंदाच्या  सरी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

हि  बोबड्या  बोलांनी  काय  काय  मागेल,
माझ्यातला  बाप  जागा  होऊन त्या  स्वप्नांमागे  लागेल,
गांभीर्य  आलंय  वागण्यात  सोडून सारी  मस्करी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

उरलेलं  आयुष्य  आता  फक्त  याच  शब्दांसाठी,
आणि  हीच  तर  बनेल  माझ्या  आधाराची  काठी,
मी  हि  वेड्याने  सजवली  क्षणभरात  स्वप्नन्यारी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

तिच्या  पंखांसाठी  हवं  आकाशसुद्धा  मोठ्ठं,
पण  माझ्या  घरट्याचं  अंगण  फारंच  छोट्ट,
तिच्यासाठीच   खर्च  करीन  सुख्ख  माझी  सारी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

मोठी  होऊन जेव्हा  मिळवत  राहील  यश,
गर्वाने  सांगेल  "maza   baba   is   the   बेस्ट",
आयुष्याची  सार्थकता  तेव्हाच   होईल   खरी,
आज  मनामध्ये  वाटतंय  जाम  भारी.

................अमोल
« Last Edit: February 06, 2012, 08:44:21 PM by amoul »