Author Topic: श्रावण साजण....  (Read 1586 times)

Offline shashaank

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श्रावण साजण....
« on: July 30, 2012, 12:41:45 PM »
श्रावण साजण....

रेशीम सरींना
गुंफतो उन्हात
श्रावण साजण
येतो गं भरात

कोवळ्या थेंबांना
सांभाळी हातात
पान पान डुले
नाजुक तालात

जाई जुई पानी
शुभ्रशी कनात
मंद मंद गंध
झुलवी मनात

शोभली सवाष्ण
गर्द हिरव्यात
नथ चमकते
मोत्यांची उन्हात

सणांचा श्रावण
झुलतो झुल्यात
गहिरी मेंदीही
खुलते हातात

कान्हाही भुलला
राधेचे दर्शन
यमुना कल्लोळी
भेटवी चरण

रसीला श्रावण
रंगीला साजण
धणी ती न पुरे
करीता वर्णन..


-shashaank purandare.

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline विक्रांत

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #1 on: July 30, 2012, 11:43:03 PM »
aavadli

Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: श्रावण साजण....
« Reply #2 on: July 31, 2012, 10:49:18 AM »
शोभली सवाष्ण
गर्द हिरव्यात
नथ चमकते
मोत्यांची उन्हात


far chan kalpna shashank....

maithili panse

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #3 on: December 17, 2012, 09:00:22 AM »
Shashank, I really enjoy your various poems, just keep it up.
My all best wishes.

Offline विक्रांत

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #4 on: December 18, 2012, 03:45:58 PM »
सुंदर, पुन्हा एकदा

धर्मेंद्र चव्हाण

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #5 on: May 28, 2013, 03:21:32 PM »
nice one

धर्मेंद्र चव्हाण

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #6 on: May 28, 2013, 03:21:55 PM »
nice one

Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: श्रावण साजण....
« Reply #7 on: May 29, 2013, 01:38:27 PM »
छान.... :)

Offline shashaank

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Re: श्रावण साजण....
« Reply #8 on: July 12, 2013, 10:54:00 AM »
Thanks a lot ....

Offline sweetsunita66

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  • प्रेमा साठी जगणे माझे ।
Re: श्रावण साजण....
« Reply #9 on: July 12, 2013, 09:32:15 PM »
जाई जुई पानी
शुभ्रशी कनात
मंद मंद गंध
झुलवी मनात

शोभली सवाष्ण
गर्द हिरव्यात
नथ चमकते
मोत्यांची उन्हात  :) वाह मस्तं कविता शशांक