Author Topic: आयुष्य  (Read 664 times)

Offline spandan123

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आयुष्य
« on: October 20, 2012, 11:46:25 AM »
 
आपल्या  आयुष्यावर  केवळ आपलाच  अधिकार  नसतो 
म्हणूनच  तर  आपण  एकटे  जगत  नसतो 
 
आयुष्यात  बंधनाचे  अनेक  धागे  गुंतलेले  असतात 
आपण  मात्र  फक्त  गुरफटलेले  असतो 
 
आयुष्यातला  हा  गुंता  सोडवणं  कधीच  शक्य  होत  नाही 
कारण  सगळ्याच  गोष्टी  आपल्या  मनासारख्या   होत  नाही 
 
हा  गुंता  सोडवायाचाही  नसतो   
गुरफटत  जाऊन  त्यातच  आनंद  शोधायचा  असतो 
आयुष  हे  असाच  जगायचं  असत   
दुख:  सोसून  दुसर्यासाठी  हसायचा  असत
भेटणाऱ्या  माणसांना  नाराज  करायचा  नसतं 
त्यांचाही  आपल्यावर  अधिकार आहे   असं  समजून  सावरायचं असत 
ह्या  जगात  कोणीतरी  कुठेतरी  आपल्यावर  मनापासून  प्रेम  करत  असतो 
म्हणूनच  कि  काय  आपण  आयुषभर  त्याची  वाट  पाहत  असतो   
आयुष्य  नुसत  जगायचं  नसतं  त्यावर  प्रेम  करायचं  असत 
कारण  आपल्या  आयुष्यावर  केवळ  आपलाच  अधिकार  नसतो 
आपल्या  आयुष्यावर  केवळ  आपलाच  अधिकार  नसतो 

Sandeep Gojare


Marathi Kavita : मराठी कविता

आयुष्य
« on: October 20, 2012, 11:46:25 AM »

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Offline विक्रांत

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Re: आयुष्य
« Reply #1 on: October 20, 2012, 10:52:01 PM »
ragi beragi font colours tras dayak vattat ,font motha ani vegala vapral tar bare  hoil.
दुख:  सोसून  दुसर्यासाठी  हसायचा  असत
भेटणाऱ्या  माणसांना  नाराज  करायचा  नसतं 

हे विश्वची माझे घर
ऐसी मति जायची स्थिर
किंबहुना चराचर
आपण जाहला

Offline spandan123

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Re: आयुष्य
« Reply #2 on: October 21, 2012, 09:03:47 AM »
धन्यवाद विक्रांत ,
             आपली  प्रतिक्रिया आणि  सूचना बदल धन्यवाद

 

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