Author Topic: एक एक धागा आठवणीचा  (Read 1384 times)

Offline Mandar Bapat

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एक एक धागा आठवणीचा
« on: October 24, 2012, 11:38:50 AM »
असंख्य  प्रश्नाने  ग्रस्त  मी
कुठे असा  गुरफटलो मी
एक एक धागा  आठवणीचा
विणत  पुढे जगतोय मी !!!!!
 
रोज खिडकीतून   तेच किरन कोवळे
संगे खेळाया मज बोलवे
तिथे  खगही पाखरान संगे 
मज  पिलाप्रमाणे  खेळवे !!!!!

पाऊस   तो सुरेख बरसे
त्यास इंद्रधनुष्य घाली वळसे
वाटे लटकुनी  त्या वेला
उंच उडी घ्याया जीव तरसे !!!!

रात्र मखमली पांघरी चादर निळी
ओढून मी ती  मिठीत आवळी
चिडून  मग चंद्र तारे त्वेषाने   
अंती माझा कानही पिळी!!!!!

आजही  न कळे मजला कोणाचे कोण
तो चंद्र कोण,पाऊस अन ती रात्र कोण
बस शिकलो मी इथे आता
मी इथे कोणाचा अन माझे आता कोण कोण !!!!

असंख्य  प्रश्नाने  ग्रस्त  मी
कुठे असा  गुरफटलो मी
एक एक धागा  आठवणीचा
विणत  पुढे जगतोय मी !!!!!

 
 
                                        .........मंदार  बापट

Marathi Kavita : मराठी कविता


Shweta G

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #1 on: October 26, 2012, 10:23:21 AM »
chan kawita...apratim

Offline Mandar Bapat

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #2 on: October 26, 2012, 11:03:03 AM »
Thanks Shweta..:)

Offline Mandar Bapat

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #3 on: November 17, 2012, 09:28:22 AM »
Dhanyawad

Sagar Deshmukh

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #4 on: November 22, 2012, 11:41:16 AM »
apratim...khup chan..

Offline Mandar Bapat

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #5 on: November 22, 2012, 09:28:11 PM »
Dhanyawad sagar

monica

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Re: एक एक धागा आठवणीचा
« Reply #6 on: November 26, 2012, 11:43:46 AM »
chan khup aawdli...

असंख्य  प्रश्नाने  ग्रस्त  मी
कुठे असा  गुरफटलो मी
एक एक धागा  आठवणीचा
विणत  पुढे जगतोय मी !!!!!