Author Topic: उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे  (Read 1121 times)

Offline sameer3971

  • Newbie
  • *
  • Posts: 40
उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे
« on: October 10, 2015, 11:57:11 AM »
कटती नही है राते,
उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे
क़रवट बदलते बदलते
ये रैना बिताओ मैं कैसे

कही से वो आए
गले से लगाए
इन्न सर्द रातों मे
मुझे छेड़ जाए.
खिलती नही है अब
लब्बों की पंखुड़ी
कटती नही है राते
उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे


अब उन्ही का इंतेजार
आँखों मे बसा है
घनी बदरी भी अब

बरसाने लगी है.
बूँदों मे खुदको
अकेले भिगाऊ मैं कैसे
कटती नही है राते
उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे

कली खिलाने को तरसने लगी है
महेक से ही अपने भिखरने लगी है
उसे कोई कहे दे हवाओ सा जाके
तेरे इश्क़ की ये खुमारी चढ़ि है
आहों से मचलती ये गर्म
साँसे संभालू मैं कैसे
कटती नही है राते
उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे

समीर बापट
मालाड, मुंबई.
10th October 2015.

« Last Edit: October 10, 2015, 01:15:50 PM by sameer3971 »

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline sameer3971

  • Newbie
  • *
  • Posts: 40
Re: उफ़! अब मैं सोऊ भी कैसे
« Reply #1 on: October 21, 2015, 03:40:50 PM »
Thanks