Author Topic: aathvan majhi  (Read 1734 times)

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aathvan majhi
« on: August 15, 2015, 06:47:47 PM »
एक  दिवस असा येईल  जेव्हा  तुला  ते दिवस आठवतील 
एक  दिवस असा येईल  तुला माझी  उणीव भासेल,
एक दिवस असा येईल  जिथे पाहशील  तिथे माझाच चेहरा दिसेल तुझी नजर खुप  शोधेलं  मला पण तेव्हा मी कुठेचं  नसेलं.




Nayan sonwane

Marathi Kavita : मराठी कविता

aathvan majhi
« on: August 15, 2015, 06:47:47 PM »

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वाह रे जमाने तेरी हद हो गइ
« Reply #1 on: August 20, 2015, 05:07:44 PM »
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी,
तेरी सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

पेट पर सुलाने वाली,
पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का,
माँ पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

माँ मॉजती बर्तन,
वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू ,
उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
तेरी कहाँ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

अरे जिसकी कोख में पला,
अब उसकी छाया बुरी लगती,
बैठ होण्डा पे महबूबा,
कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की,
वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

बेबस हुई माँ अब,
दिए टुकड़ो पर पलती है, :'(
अतीत को याद कर,
तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत
 हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
I love so much my mother...


 

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