Author Topic: प्रेम कविता  (Read 1494 times)

Offline kumudini

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प्रेम कविता
« on: April 25, 2013, 02:49:38 PM »
     दवबिंदू

थेंब  दवाचा

करी  गुदगुल्या 

नाजूक  कालीकाला 

मोहरल्या  त्या 

अंगी   शहारल्या

अन  अवचित 

फुलून  आल्या 

अरुण  उगवला 

थेंब  गळला

फुललेल्या  त्या 

सुकुनी  गेल्या 

करी  प्रतीक्षा 

पुन्हा  उद्याची 

अपूर्णतेचा  असे

शापच  का   प्रीतीला

कुमुदिनी  काळीकर     

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: प्रेम कविता
« Reply #1 on: April 26, 2013, 10:45:51 AM »
छान कविता आहे!  :) :) :)