Author Topic: अबोल प्रीत  (Read 2183 times)

Offline kumudini

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अबोल प्रीत
« on: May 14, 2013, 02:42:06 PM »
                   
शब्दात  बांधू  कैसी  ही  भावना  मनीची

मी  वाट पाहताहे  तू  साद  घालण्याची

अवचित  येउनिया  मजला  मिठीत  घ्यावे

गुंतुनिया  तुझ्यात  मी  प्रणयात  दंग व्हावे

हे  स्वन  लोचनाचे  ही  भावना  उरीची   

होताच  स्पर्श  तुझा  लाजाळू  मीच  व्हावे

रंगूनी  गुगूनी  मी  तुझ्यात  विरघळावे

हे  स्वन  सत्य  व्हावे  ही  आस  अंतरीची

                                                        कुमुदिनी  काळीकर   

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline मिलिंद कुंभारे

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  • ती गेली तेव्हा रिमझिम पाऊस निनादत होता!
Re: अबोल प्रीत
« Reply #1 on: May 14, 2013, 02:47:07 PM »
फारच छान !!!

deshpande Arpita

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Re: अबोल प्रीत
« Reply #2 on: May 26, 2013, 08:11:59 PM »
CHANCH