Author Topic: आईची माया  (Read 1072 times)

Offline Mrs. Sanjivani S. Bhatkar

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आईची माया
« on: August 12, 2013, 03:39:57 PM »
आईची  माया 


नौ  मास  उदरी
वेदना  प्रसुतीचा 
तीच  सोसते
आई  शेवटी  आईच  असते 
तिची  माया तिची  छाया
वेगळीच  असते     
नुसत्या  रडण्याचाही  आई 
तुला  इशारा  समजायचा 
माझ्या  बोबड्या  बोलण्याचाही 
तुला  अर्थ  लागायचा 
काऊ  – चिऊ  चा  घास  भरवताना   
तू  काय  काय  नाही  करायचीस
माझ्या  बरोबर  धावयाचीस
माझ्या   सारख  रुसायचीस 
देऊन  संस्कार  तीच  घडवते
कधी  होऊन  कठोर  तीच  रडवते 
तीच  कुशीत  घेऊन 
मायाही  देते 
आजारी  मी  असताना 
डोळे  तुजे  जागायचे
माझ्या  आयुष्यासाठी 
आई  नवस  किती  करायच
कठीण  समयी  बसून  समीप 
रात्र  रात्र  तीच  जागते
आशी  प्रेमळ  केवळ 
आई  आणि  आईच  असते 
तुझ्यातल्या  भक्तीचा  अर्थ   आता  कळला 
त्या  समाधानाचा  अर्थ  आता कळला 
आता  कळले  मला  आई   
“आई  पणाचे   मोल  “

 


- सौ . संजीवनी  संजय  भाटकर

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