Author Topic: पुन्हा जन्म घ्या ज्योतिबा आता  (Read 877 times)

Offline कवि । डी.....

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  • कवितेसाठी जन्म आपुला
पुन्हा  जन्म  घ्या  ज्योतिबा  आता
बदलवया  पुरूषी  मानसिकता
बळ  दिले  तुम्ही  सावित्री  माता
शिक्षणाची  दारे  उघडली आता

दगडगोटे  खाऊनी  सोसला  छळ
जरी  ती होती वाईट  वेळ
शिक्षणाची   तुम्ही  जोडली  नाळ
दुर  केले वातावरण  ढगाळ

चोहीकडे  नांदती  वासनेची  भुतं
आजही  आहे  नराधमांची  जात
जर  कुंपणच  शेत  खात
कशी  राहील  ती  सुरक्षित

जगी  अंधार  झाला   फार
नका   करू  आता  उशीर
पुन्हा  जन्म  घ्या  ज्योतिबा  आता ...
पुन्हा   जन्म  घ्या  ज्योतिबा  आता .................


                     । कवि-डी ।
                     स्वलिखीत
                  दि. 02. 03.2014
                 वेळ. रात्री  7. 10