Author Topic: सोंगी फार रात्र थोडी  (Read 931 times)

Offline कवि । डी.....

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सोंगी फार रात्र थोडी
« on: March 12, 2014, 09:23:16 AM »
निवडणूक   येता  जवळी
करती  संकल्प  नेतेमंडळी
चढाओढ  त्याची  अवेळी
श्रेय  लाटण्या  ही  खेळी

झालेल्या  कामांची  यादी
पुन्हा  वचनाची  गादी
भुलतो    मतदार  राजा
भोगतो  पुन्हा  तो  सजा

वाटले  मला  करावा  संकल्प
भांडली  कितीही  ती  रहावे  अबोल
मीही  देत  होतो  संकल्पाची   यादी
संसारात  सोंगी  फार,  रात्र  थोडी. ..रात्र  थोडी. .......


                । कवि-डी ।
                स्वलिखीत
                दि. 12. 03.2014
                वेळ. ससकाळी .09.  18




Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline dipak chandane

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Re: सोंगी फार रात्र थोडी
« Reply #1 on: March 12, 2014, 05:50:25 PM »
nice poem sir..........if u have time pls u read my poem राजकारण..!

Offline कवि । डी.....

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Re: सोंगी फार रात्र थोडी
« Reply #2 on: March 13, 2014, 08:20:34 AM »
दिपक  कविता कोणत्या टाॅपीकमध्ये व कोणत्या पानावर आहे