Author Topic: मन काही भरत नाही  (Read 1493 times)

Offline कवि । डी.....

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 165
  • Gender: Male
  • कवितेसाठी जन्म आपुला
मन काही भरत नाही
« on: March 12, 2014, 11:30:49 PM »
तु  असं  फुल
कितीही  पाहिले  तरी
पहावचं  वाटतं

तु  असा  गंध
कितीही  घेतला  तरी
घ्यावचं  वाटतं

तु  असा  स्वाद
कितीही  चाखला  तरी
चाखावचं  वाटतं

तु  असा  स्पर्श
कितीही  केला  तरी
करावचं   वाटतं

तु  असं  प्रेम
कितीही  केलं  तरी
करावचं  वाटतं

कारण  पोट  भरलं  तरीही
मन  काही  भरत   नाही
तुझ्याशिवाय  आयुष्यात  माझ्या
शिल्लक   काही  उरत  नाही. ........
शिल्लक   काही  उरत  नाही. ....................


                   । कवि-डी ।
                  स्वलिखीत
                 दि. 12. 03.2014
                  वेळ. रात्री 11. 27

Marathi Kavita : मराठी कविता