Author Topic: पळून गेली असती  (Read 1582 times)

Offline कवि । डी.....

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पळून गेली असती
« on: March 24, 2014, 07:22:13 PM »
कामवाली  मला  आज
असं  सांगत  होती  की

त्यांनी  मला  फसवलं
खोट  बोलून  नातं  जुळवलं

मी  दिसायला  सुंदर
कामातही  आहे  हुशार

नवरा  माझा  बिनकामाचा
नाही  माझ्या  तोडीचा

आता  काय  उपयोग
मी   फसले  आहे

नशीबाचे  सगळे  भोग
भोगत  बसले  आहे

साहेब  तुम्हाला  सांगते
मी  आहे  म्हणून  नांदले

दुसरी  कुणी  असती  तर
पळून  गेली  असती

मी ही  मनात  म्हटलं
प्रत्येक  बाईला  असंच  वाटतं

तु  कामवाली  काय  ?
अन्  माझी  बायको  काय  ?


               । कवि-डी ।
                स्वलिखीत
                दि .24. 03.2014
               वेळ. रात्री. 07. 22

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