Author Topic: आई होऊ की करीअर करू ?  (Read 1819 times)

Offline कवि । डी.....

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आई होऊ की करीअर करू ?
« on: May 11, 2014, 01:53:04 PM »
तिझी  आणि   माझी  ती  भेट  मला  आजही  आठवतेय . ती  माझी  प्रेयसी  होती.  मला  जीवापैक्षाही  प्रिय  होती .  ती  म्हणाली , मी  तुझ्याशी  लग्न करण्यासाठी तयार  आहे  पण  मला  मुल  नको  आहे .  कारण  मी  करीअर  करू  का  मुलाचं ? तेच ते  रांधा  वाढा  उष्टी  काढा  असल  मला  नाही  जमणार.  त्यामुळे  मी  फक्त  करीअरच  करणार  आहे.  याबाबत  तुला  पुर्ण  माहिती  असावी  म्हणून  सांगतेय.   याबाबत  तुझ  हो  असेल  तर  आपण  लग्न  करू.  या  प्रश्नावर  तिला  माझ्याकङून  उत्तर  हव  होत.   मी  तर हे ऐकूनच हादरून  गेलो.  आज  एवढी  स्री  शिकली  प्रगती  झाली.  पुरूषांच्या  खांद्याला खांदा  लावून  काम करू  लागली.  पण  जगातील  सर्वांत  सुंदर अस वरदान  जे  फक्त  स्री ला  लाभले आहे.  ते म्हणजे  आई  होणे ,  तेच  तिला  नको  आहे . कारण  मिळणार्‍या  त्या  चार  पैशासाठी . खरचं आम्ही  स्वतःला  खूपच  भाग्यवान  समजतो  की  आमची आई   घरी  होती .  तिचं   प्रेम ,  तिच  हातान भरवन  हे  सगळ  अनुभवल होतं.  आताच्या  आई बाबांना  त्यांच्या  करीअर , काॅम्युटर , मोबाईल  मुळे  मुलांना  बोलण्यासाठी  वेळ च  नाही  बाकीच्या  गोष्टी  तर  सोडाच. 
        ही  आजची  पिढी  कुठं  चालली  आहे .  नुकत्याच  मात् दिनाच्या  शुभेच्छा  देऊन  किंवा   कविता  करून  काय  उपयोग आहे.  पैशाच्या  आणि  करीअरच्या  नादी  लागून  स्री  घराबाहेर  पडली . तुमची  सोन्यासारखी ,  हिर्‍यासारखी  मुल  घरात  एकटीच  आहेत. काहीना  तर  ते ही  मुल  नको आहेत .काय  संस्कार  देणार  आहात  तुम्ही  पैसा  कमवून आणि  त्याला  एकट  घरी  ठेवून ?
     कधी  मिळेल  त्याला  त्याची  आई , कधी  मिळेल  त्याला त्याच्या  हक्काचं  प्रेम,  कधी  मिळेल  त्याला त्याच्या  आईच  दूध, ?

          खरचं   जिजाऊ  आज  घरात  पाहिजे  तरच   प्रत्येक  घरात  शिवबा   जन्म  घेईल   नाही  तर  नुसती  भेकड  मेंढर    पैदा   केली  म्हणून  समजा .

सलाम त्या  मातेला .  लाख लाख   शुभेच्छा  त्या   मातेला   जिन  स्वतच  रक्त   आटवून  दुध   पाजलं .



                                       । कवि-डी ।
                                         स्वलिखीत
                                        दि. 11.  05.  2014
                                     वेळ.  दुपारी.  01.  52
           


 
« Last Edit: May 11, 2014, 01:59:53 PM by कवि । डी..... »

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