Author Topic: मैं प्रेम का पुजारी हूँ ।  (Read 1084 times)

Offline SONALI PATIL

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तू कर पत्थरोंकी बरसात,
फूल बन जाय़ेगीं वो ।
मैं दुखः को सुख में बदलता हूँ,
क्यों की मैं प्रेम का पुजारी हूँ ।
बंजर जमीन में भी ऊगावूगाँ पौधा,
क्यों की वो प्यासी है,
प्यार और ममता की ।