Author Topic: यांत्रिक प्रेम  (Read 935 times)

Offline kasturidevrukhkar

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यांत्रिक प्रेम
« on: November 03, 2014, 01:01:44 AM »
आठवड्याचा  पहिला  दिवस ,
सकाळी  उठल्यावर  माझा  मूड  मस्त  होता,
पण  तो  मात्र  कामाच्या  व्यापाने  त्रस्त  होता,
त्याचे  नेटवर   सर्फिंग  चालू  होते  ,
माझे  मात्र ,  दुपारच्या   मेनू साठी  सर्चिंग  चालू  होते.

अचानक  गार  वारा  वाहू  लागला
पावसाच्या   रिमझिम  सरी  खिडकीच्या  काचांवर ,
थेंबाच्या  रुपात  बरसू  लागल्या

मग  , माझ्या  मनाने  उचल  घेतली ,
त्याला  म्हटलं  आज  सुट्टी  घे  ऑफिसला
काय  फरक  पडतो  ,एक  दिवस   नाही  गेलास  कामाला ?
त्यावर  तो  म्हणाला ,
नको  ग  बाई  !  उत्तर  काय  देणार 
डोक्यावर  बसलेल्या  बापाला ?

तो  म्हणाला ,
ही  फाईल  आज  करायची  आहे  complete
मी  म्हणाले  ,
अरे  पण  नुकतीच  एक  फाईल
माझ्या   ह्रदयाच्या   फोल्डर  मधून  Transfer  होते  आहे  ,
ती  तर  copy  करशील !

त्यावर  त्यांने   एक  धावता  लूक  दिला,
आणि  क्षणाचाही  विलंब  न  लावता
Sorry  this  file  can't  complete  चा  remark  ठेवून  दिला

मग   एका  एकी , वीजांचे  कडकडाट  झाले ,
ढग  गडगडले ,
काय  करावे  त्याला  काही  सुचेना
उठलेल  वादळ  शांत  करणं  त्याला  काही  जमेना,

मग  त्याने  सुट्टीचा  प्रस्ताव  मान्य  करण्याचे  ठरविले
तेव्हा  कुठे  विचारांचे  नेटवर्क  एका  जागी  स्थिरावले,

फॅमिली  ड्रामा  , प्रेमकथेवर  येऊन  थांबला
यांत्रिक  जीवनावर  आज  त्यांने  प्रेमाचा  विजय  होताना  पाहिला .

                       - सौ.  कस्तुरी  कुणाल  देवरुखकर.

Marathi Kavita : मराठी कविता

यांत्रिक प्रेम
« on: November 03, 2014, 01:01:44 AM »

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